उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने का रहस्य…..

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टी एन आई न्यूज़ एजेंसी -आज हम आपको उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने के रहस्य के बारे में बताते हैं 24 अक्टूबर को महाराष्ट्र विधानसभा का परिणाम त्रिशंकु विधानसभा के रूप में आ चुका था बिना शिवसेना के भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं थी इधर शिवसेना अपना मुख्यमंत्री बनाने हेतु व्याकुल थी और ढाई ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री का पद चाहते हुए बीजेपी के साथ मिलने को तैयार थी लेकिन बीजेपी इस फार्मूले पर सहमत नहीं थी इसलिए शिवसेना ने अलग रास्ते जाने का फैसला कर लिया

अब महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी 105 शिवसेना 56 एनसीपी 54 और कांग्रेसी 44 विधायकों के साथ सबसे छोटी पार्टी के रूप में उभरी इसके अलावा समाजवादी पार्टी भी कुछ विधायक चुनाव जितवा कर सदन में ले आई बाकी के निर्दलीय भी चुनाव जीतकर सारे 288 विधायक महाराष्ट्र विधानसभा सदन में निर्वाचित हो गए लेकिन शिवसेना का बीजेपी का साथ ना देने से वहां पर किसी की नहीं सरकार बनने की स्थिति बन गई थी सबसे पहले कांग्रेस को एनसीपी के साथ लाकर शिवसेना के साथ जोड़ने के लिए जोड़-तोड़ शुरू हुआ कांग्रेसका आलाकमान शिवसेना के साथ नहीं जाना चाहता था लेकिन महाराष्ट्र में जो कांग्रेस के विधायक 44 चुने गए थे उनमें से 38 विधायक शिवसेना के साथ सरकार बनाने के लिए तैयार थे कुछ विधायक एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मिलकर उनकी पार्टी में शामिल होकर सरकार बनाने के पक्ष में थे लेकिन शरद पवार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया इससे उनके हौसले गढ़बड़ाने लगे इतना ही नहीं शरद पवार के सामने कांग्रेस हाईकमान को बता दिया अगर आप सरकार बनाने के लिए सहयोग नहीं देंगे तो आपकी पार्टी के अधिक्तर विधायक टूट कर इधर उधर चले जाएंगे और पार्टी के पास कुछ नहीं बचेगा इसलिए बेहतर यही होगा कि हम एनसीपी और कांग्रेस शिवसेना की सरकार को सहयोग करके उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बना दें

लेकिन खेल इतना आसान नहीं था भारतीय जनता पार्टी इस फार्मूले को देखते हुए जम्मू कश्मीर की तरह दावा पेश होने से पहले विधानसभा को भंग कर सकती थी इसलिए शरद पवार ने डबल गेम खेलना शुरू कर दिया कभी सोनिया गांधी से मिलते कभी शिवसेना वालों से मिलते कभी नरेंद्र मोदी से मिलने लगे और अजीत पवार को भारतीय जनता पार्टी के शरण में भेजकर राष्ट्रपति शासन हटवा लिया इधर आपाधापी देखकर कांग्रेसमें भी उद्धव ठाकरे शिवसेना को सहयोग करने का आनन-फानन में निर्णय कर दिया और बाद में पवार साहब ने अपने सारे विधायक इकट्ठे किए और शिवसेना की झोली में डाल दिए

उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव बनने लगा उधर अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री बस से इस्तीफा देकर बीजेपी की राह मैं कांटे बिछा दिए इस कारण मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को भी इस्तीफा देना पड़ा उन्होंने बयान देकर कहा अजीत पवार हमारा साथ छोड़ गए हैं अब हमारे पास बहुमत नहीं है इसलिए मैं इस्तीफा दे रहा हूं जैसे ही बीजेपी के मुख्यमंत्री हैं इस्तीफे की घोषणा की शरद पवार ने दांव खेलकर उद्धव ठाकरे को शिवसेना कॉन्ग्रेस और एनसीपी विधायक दल का नेता चुनवा दिया अब महाराष्ट्र मान: राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी एवं बीजेपी आलाकमान के पास उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा और उद्धव ठाकरे को राज्यपाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ के लिए आमंत्रण दे दिया विधानसभा सत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बुलाया गया था पहले उसमें विधायकों को शपथ दिलाई गई बाद में उद्धव ठाकरे ने शिवाजी पार्क में मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली और विधानसभा में 169 विधायकों के समर्थन से विश्वास मत हासिल कर लिया और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए शरद पवार ने ऐसा दांव खेला जिसमें बीजेपी के चाणक्य अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चारों खाने चित हो गए और महाराष्ट्र विधानसभा भी भंग होने से बच गई तथा वहां पर राष्ट्रपति शासन भी हटा लिया गया और देवेंद्र फडणवीस भी आसानी से विदा हो गए तथा उधव ठाकरे मुख्यमंत्री बन गए सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी

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