तीन दशक पूर्व बांदा जनपद से चोरी गई अति प्राचीन मूर्ति…..दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय की शोभा बन गई

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टी.एन.आई न्यूज एजेंसी तीन दशक पूर्व बांदा जनपद से चोरी गई तृष्णा योगिनी की अति प्राचीन मूर्ति अब दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय की शोभा बन गई है। बेशकीमती और आकर्षक मूर्ति को न सिर्फ देश बल्कि विदेशी भी दिलचस्पी से देख रहे हैं। 6 फरवरी 1982 को तस्करों ने तत्कालीन बांदा (वर्तमान में चित्रकूट) जिले के लुखरी गांव की पहाड़ी पर स्थित मंदिर से बेहद प्राचीन और दुर्लभ तृष्णा योगिनी की मूर्ति चोरी कर ली थी। तमाम तलाश के बाद भी इसका कुछ पता नहीं चला। 1996 में इसे लंदन में देखा गया। बाद में यह मूर्ति किसी तरह मुंबई आ गई। वर्ष 2010 में मुंबई की एक एंटिक शाप से इसे फ्रांस (पेरिस) के संग्रहकर्ता रोबर्ट ने खरीद लिया और पेरिस ले गया। मूर्ति का वजन लगभग 4 क्विंटल बताया गया है। यह 64 योगनियों में से एक है. रोबर्ट के आकस्मिक निधन के बाद उसकी पत्नी मार्टिन ने यह मूर्ति भारत को वापस लौटा देने की इच्छा जताई। वर्ष 2012 फ्रांस गईं भारत सरकार में संस्कृति मंत्रालय सचिव को इस बात की जानकारी पेरिस में भारतीय राजदूत ने दी। सचिव और मौजूदा विदेश मंत्री के प्रयासों से इस मूर्ति को 21.09.2013 को दिल्ली ले आया गया है। वहां इसे राष्ट्रीय संग्रहालय (नेशनल म्यूजियम) में रखा गया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मूर्ति की कीमत 25-30 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। गौर तलब है कि ऐसी मूर्तियां तत्कालीन तांत्रिक पहाड़ों पर चोरी-छिपे बनाते थे और सिद्ध किया करते थे। योगिनी देवी को ऊंच-नीच का विरोधी माना जाता है।
नसीर अहमद सिद्दीकी, राष्ट्रीय महासचिव,
अखिल भारतीय बुन्देलखंड विकास मंच (पंजीकृत गैर लाभकारी एवं राजनैतिक संस्था)
09891941675

पुनाहुर (बांदा) के मूल निवासी

टी.एन.आई. (टी.वी.न्यूज इन्डिया) न्यूज एजेंसी के फीचर एडीटर

सिद्दीकी ने भारत सरकार और फ्रांस राजनयिकों के साथ पत्र व्यवहार द्वारा योगिनी की तंत्र विद्या से जुडी कहानियों को साझा कर मूर्ती वापसी में लगातार सहयोग मांगा.

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