डाक्टर ब्रम्हे शासन को गुमराह कर ले रहा सरकारी आवास का लाभ….सौ रुपए के स्टांप में लाखो की राजस्व चोरी

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बालाघाट। चिकित्सक जी.आर ब्रम्हे जो कई सालो से जिला चिकित्सालय में निश्चेतन विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत है। जिन्होने 2004 में दीनदयाल पुरम हाउसिंग बोर्ड कालोनी में एमआईजी 19 में मकान खरीदा था जिसका पटवारी हल्का नंबर 13/2 है। जिन पर आरोप है कि उनके पास स्वंय का निजी मकान है, बावजूद इसके वे शासकीय चिकित्सालय के सामने शासकीय आवास को आंबटित करवा लिया है और अपने नीजि आवास होने की सूचना विभाग को नही दी और उस मकान को किराये से दे रखा है। जांच व कानूनी कार्यवाही से बचने के लिये 100 रुपए के स्टांप में भोपाल निवासी हरीबाबू चदेरिया को 2006 में बेचना दिया बताया गया। जबकी वास्तव में उक्त मकान का कब्जा मालिकाना हक व टेक्स तथा मकान का जिर्णोद्वार कार्य डाक्टर ब्रम्हे के द्वारा वर्तमान में कराया जा रहा है।
                                नियम के मुताबिक 100 रुपए के स्टांप की अवधि मात्र छह माह की होती है जबकी 2006 में मकान विक्रय किया बताया जा रहा है तो अब तक उक्त मकान की रजिस्ट्री भी 14 साल बीत जाने के बाद नही हो पाई है। डाक्टर ब्रम्हे द्वारा शासन को गुमराह कर तीस लाख की संपति को 100 रुपए के स्टांप में बेचकर लगभग तीन लाख की राजस्व चोरी की तो वहीं अपना मकान होते हुये भी सरकारी आवास में रहकर शासन को नुकसान पहुचाया है। जिस पर दांडिक किराया मामला बनता है परंतु पूर्व में जितने भी सीएचएमओ रहे है उनके द्वारा डां ब्रम्हे पर कोई कार्यवाही नही की। 14 साल से मामले को दबाकर रखा है, वही शिकायत होने पर जांच पर जांच की जा रही है लेकिन कार्यवाही ठंडे बस्ते में ही है।
                     आश्चर्य की बात यह है कि अपने बचाव में जो दस्तावेज डाक्टर ब्रम्हे ने प्रशासन को पेश किया है। वह सही है तो 2006 से विक्रय किया मकान की 14 साल बाद भी रजिस्टरी क्यो नही की गई। अगर नही की गई है तो यह अनुबंध छह माह बाद स्वत: ही समाप्त माना जाता है। तो इस बाद की पुष्टि स्वत: हो जाती है कि आज भी मकान का आधिपत्य व स्वामित्व का अधिकार डाक्टर ब्रम्हे के ही पास है और वह वर्तमान में मकान को जमीदोज कर  नये मकान का निर्माण कार्य करवा रहा है, जो उनके स्वामित्व को दशार्ता है। परंतु स्वास्थ्य विभाग गैरकानूनी रूप से डाक्टर ब्रम्हे को सरकार आवास दिये हुये है। जिसका दांडिक किराया भी नही वसुला गया है। किसी भी चिकित्सक उसके आवास से 20 किलोमीटर की दुरी पर कार्यस्थल होने पर सरकारी आवास की सुविधा आपातकालीन सेवा के लिये दी जाती है जिसका गलत फायदा उठाकर डॉ ब्रम्हे सरकारी आवास का लाभ ले रहें है और स्थानीय मकान को किराये पर दिये हुये।
                                  इस तरह शासन से धोखाधडी कर शासन को नुकसान पहुचा रहें है। जबकी इसकी जांच पहले भी हो चुकी है। जिसमें उक्त प्रकरण सभी आला अधिकारियो के सामने प्रस्तुत कर जांच रिपोर्ट तैयार कर दांडिंक किराया वसुल करने हेतु आदेश भी दिये जा चुके है, परंतु सीएचएमओ के द्वारा अपने कर्तव्य का निर्वहन ना कर जान बूझकर इस मामले में हीला हवाली बरतकर डा ब्रम्हे के कृत्य को छुपाया जा रहा है जो व्यक्तिगत हित साधते प्रतीत हो रहा है। नियम के मुताबिक सीएचएमओ को डां ब्रम्हे के खिलाफ पुलिस में 420 के तहत मामला दर्ज करवाया जाना चाहिये, जो सी.एच.एम.ओ ने नही किया। बल्कि उन्हे सरंक्षण देकर अपराध को बढावा दिया गया है। अनावश्यक तौर पर जांच की जांच कराकर एक दुसरे पर टाल-मटोली कर रहें है।

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